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उपचार एवं नियंत्रण

 
परिचय  
इन्हेलर्स बेहतर क्यों हैं?  
इन्हेलर्स के लिए अस्थमा दवाइयों के प्रकार  
इन्हेलर्स का उपयोग कैसे करें  
अपने अस्थमा को नियंत्रण में कैसे रखें  
अस्थमा के दौरे के समय क्या करें  
विशेष परिस्थितियों में अस्थमा  

  परिचय  


हालाँकि अस्थमा ठीक नहीं किया जा सकता, पर अच्छी ख़बर यह है कि इसे अच्छे से नियंत्रित किया जा सकता है. आधुनिक दवाइयाँ और इन्हेलर्स ने दुनिया भर के लोगों के जीवन को सामान्य और स्वस्थ बनाया है. सही उपचार से आप भी भरपूर जीवन जी सकते हैं.

अस्थमा नियंत्रित करने के लिए सबसे पहले आपको अपने डॉक्टर से सलाह लेना चाहिए और समझना चाहिए कि क्या करना है. उदाहरण के लिए, आपका डॉक्टर आपको ट्रिगर के बारे में सलाह दे सकता है, ये वे चीज़ें हैं जिससे आपके फेफड़ों की हवा नलियों में तकलीफ़ हो सकती है.

आपका डॉक्टर आपके अस्थमा को नियंत्रित करने के लिए कुछ दवाइयाँ बताएगा लेकिन आपको अपने इलाज को वास्तव में प्रभावी बनाने के लिए उसके साथ काम करना होगा. आपको अपने अस्थमा को नियंत्रित करने के लिए दवाइयाँ ठीक वैसे ही लेना चाहिए जैसा आपके डॉक्टर ने कहा है. आपका डॉक्टर आपको यह भी बता सकता है कि इमर्जेंसी में तुरंत क्या करें.

स्वयं को जानकारियों से अवगत कराने के लिए पढ़ना जारी रखें - ट्रिगर्स से बचने के लिए क्या करें, अन्य प्रकार की दवाइयों के होते हुए भी इन्हेलर के फ़ायदे, दौरा पड़ने पर क्या करें और अस्थमा को नियंत्रण में कैसे रखें.
















  इन्हेलर्स बेहतर क्यों हैं?


इन्हेलर्स के द्वारा दवाई लेने का महत्व दुनिया में आज के आधुनिक युग में ही नहीं समझा गया है. 2000 साल पहले, प्राचीन मिस्र, ग्रीस और भारत में, लोगों ने अपनी साँस की तकलीफ़ और अस्थमा से राहत पाने के लिए जड़ी-बूटियों और पत्तियों को सूँघने के महत्व को महसूस किया. सदियों से, इन्हेलर्स विकसित किए गए और अब ये अधिक उन्नत और प्रभावी हो गए हैं.

आज पूरी दुनिया के अस्थमा रोगी इन्हेलर का उपयोग करते हैं जिससे उनकी सामान्य, दैनिक गतिविधियों को पूरा करना आसान हो जाता है. अस्थमा इन्हेलर्स ने लोगों को अस्थमा के साथ भी भरपूर जीवन जीने की आज़ादी दी है.

पूरी दुनिया में, उपचार के अन्य रूप जैसे गोलियाँ या सिरप की तुलना में अस्थमा इन्हेलर्स बेहतर साबित हुए हैं. क्यों? जब आपको अपनी आँखों में तकलीफ़ होती है, तो आप आँख में दवा डालते हैं. जब आपके त्वचा में कोई तकलीफ़ होती है, तो आप उस पर मलहम लगाते हैं. आप कोई गोली या सिरप नहीं लेते. आप दवा का उपयोग वहाँ करते हैं जहाँ इसकी ज़रूरत होती है. ठीक इसी तरह, अस्थमा के लिए आप इन्हेलर को मुँह से लगाकर दवा को साँस द्वारा अंदर खींचते हैं.

यह ज़्यादा प्रभावी है क्योंकि साँस के द्वारा ली गई दवा सीधे और तुरंत वहाँ पहुँच जाती है जहाँ इसकी ज़रूरत है, यानी आपके फेफड़ों की हवा नलियों में.

इसकी तुलना अस्थमा की गोलियों और सिरप से करें. जैसा कि आप जानते हैं कि इन्हें खाना या निगलना होगा. परंतु संभवत: आप यह नहीं जानते कि गोली या सिरप को अपना काम करने में समय लगता है क्योंकि ये पेट से रक्त में और फिर रक्त से फेफड़े में पहुँचते हैं. यह प्रक्रिया धीमी है और रोगी को आराम मिलने में अधिक समय लगता है. कुछ दवाइयाँ पेट में भी रह जाती हैं जहाँ उनकी ज़रूरत नहीं है और बहुत से साइड इफ़ेक्ट का कारण हो सकती हैं.

इसके अलावा, गोलियों और सिरप के मामले में, आपको ज़्यादा ख़ुराक की ज़रूरत होती है क्योंकि ली गई दवा में से सब कुछ फेफड़ों तक नहीं पहुँचता है. इसका अर्थ अधिक साइड इफ़ेक्ट है. जब आप इन्हेलर के द्वारा अपनी दवा लेते हैं, तो फेफड़ों में पहुँचने वाली ख़ुराक 40 गुना तक कम होती है और यह पेट में बिल्कुल नहीं जाती है, तो इसके कम से कम साइड इफ़ेक्ट होते हैं. यह आपके लिए आवश्यक है कि आप अपने आप से यह प्रश्न पूछें: “मुझे वह दवा क्यों लेनी चाहिए जो शरीर के दूसरे अंगों में जाती है जबकि मुझे केवल अपने फेफड़ों के लिए इसकी ज़रूरत है?”

यूएसए और ब्रिटेन जैसे सबसे ज़्यादा विकसित देशों में, अस्थमा की प्राथमिक चिकित्सा के रूप में इन्हेलर ने गोली और सिरप का स्थान ले लिया है. यह अस्थमा के नियंत्रण का प्रभावी और सुरक्षित तरीक़ा है.

प्रतिष्ठित वैज्ञानिक और चिकित्सा संस्थानों द्वारा किए गए क्लिनिकल अध्ययन और शोध ने यह साबित कर दिया है कि इन्हेलर सुरक्षित हैं. यदि साइड इफ़ेक्ट हैं भी तो वे बहुत ही मामूली हैं और उन्हें आसानी से कम से कम किया जा सकता है. यदि आपको थोड़ी भी असुविधा या साइड इफ़ेक्ट का अनुभव हो तो अपने डॉक्टर को सूचित करें.

अस्थमा इन्हेलर सस्ते भी हैं. बस प्रतिदिन कुछ ही रुपयों में आपको आराम मिल जाता है. इससे आपको पड़ने वाले दौरे और अस्पताल के बिल भी कम हो जाते हैं. अध्ययनों से यह भी पता चला है कि इन्हेलर का उपयोग करने वाले अस्थमा रोगी काम पर और स्कूल एवं कॉलेज में नियमित रूप से उपस्थित रहते हैं.

इन्हेलर से ली जाने वाली दवा 2 प्रकार की हैं जिन्हें कंट्रोलर और रिलीवर (तुरंत आराम पहुँचाने वाली दवा) कहते हैं. साँस के द्वारा ली जाने वाली दवाइयों के बारे में और जानकारी के लिए पढ़ते रहें. और अस्थमा के बेहतर इलाज के लिए अपने डॉक्टर से सलाह लें.

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  इन्हेलर्स के लिए अस्थमा दवाइयों के प्रकार


इन्हेलर्स ने यह साबित कर दिया है कि वे गोलियों, सिरप, और किसी वैकल्पिक दवाई से भी ज़्यादा प्रभावी और सुरक्षित हैं. अस्थमा के लिए इन्हेलर्स में 2 प्रकार की दवाइयाँ हैं:


ये इन्हेलर्स की वे दवाएँ हैं जो आपको आगे होने वाले दौरों से बचने के लिए लेना होगी. कभी-कभी इनका उल्लेख उल्लेख पिवेंटर के रूप में हुआ है. पूरी दुनिया में, अस्थमा नियंत्रित करने के लिए केवल कंट्रोलर दवाएँ ही एक प्रमाणित तरीक़ा है.

इन दवाओं से तुरंत राहत नहीं मिलती लेकिन जब ये लंबे समय तक ली जाती हैं तो आपके अस्थमा को बेहतर तरीक़े से नियंत्रित करने में मदद करती हैं. सभी जगह मान्य उपचार के दिशानिर्देश के अनुसार, जिन लोगों को लगातार लक्षण बने रहते हैं उन्हें अंदरूनी सूजन के नियंत्रण और लक्षणों तथा दौरे को रोकने के लिए लंबे समय तक ली जाने वाली दवा को प्रतिदिन अवश्य लेना चाहिए.

यदि आप नियमित रूप से अपनी कंट्रोलर दवा लेते हैं, तो आपको अस्थमा का दौरा नहीं पड़ेगा. हालाँकि, फिर भी आपको कोई दौरा आ जाता है, तो आपको तुरंत अपनी रिलीवर दवा लेनी होगी. आपके लिए यह जानना आवश्यक है कि कंट्रोलर का नियमित उपयोग करने से रिलीवर (तुरंत आराम पहुँचाने वाली दवा) की ज़रूरत कम हो सकती है और परिणामस्वरूप आपको इसका उपयोग बहुत ही कम करना पड़ेगा. लेकिन ऐसा तब ही होगा जब आप अपनी कंट्रोलर दवा का प्रतिदिन उपयोग करें. तो इसे एक अच्छी आदत के रूप में अपना लें, जैसे आप मुँह और दाँतों की समस्याओं से बचने के लिए रोज़ाना ब्रश करते हैं. उसी तरह अस्थमा दौरों से बचने के लिए आपको कंट्रोलर लेना चाहिए.

कंट्रोलर्स उपयोग करने के सुझाव

अपनी कंट्रोलर दवा प्रतिदिन एक निश्चित समय पर लें. इसलिए यदि आपको इसे दिन में दो बार लेना है, तो वह समय तय कर लें जो आपके लिए सबसे अधिक सुविधाजनक हो.
यदि आप अपने कंट्रोलर को आमतौर पर दो अलग स्थानों पर लेते हैं, जैसे एक बार घर पर और एक बार ऑफ़िस में तो आप एक कंट्रोलर घर में और एक ऑफ़िस में रख सकते हैं. कंट्रोलर को अपने साथ रखने के बजाय यह तरीक़ा आपको अधिक सुविधाजनक लगेगा.
कई बार किसी रोगी की यह शिक़ायत रहती है कि इन्हेलर काम नहीं कर रहा है, तो डॉक्टर यह पाता है कि रोगी ग़लत तरीक़े से इन्हेलर का उपयोग कर रहा है. इसीलिए यह आपके लिए एक अच्छा सुझाव है कि आप अपना कंट्रोलर डॉक्टर या उसके सहायक के सामने उपयोग करें ताकि देख सकें कि आप किसी प्रकार से ग़लत ढंग से उपयोग तो नहीं कर रहे हैं. इन्हेलर का सही उपयोग आपके अस्थमा को नियंत्रित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है.



ये तुरंत राहत और यहाँ तक कि अस्थमा के दौरे के समय तत्काल राहत के लिए साँस के द्वारा ली जाती हैं. इन थोड़े समय तक ली जाने वाली दवाओं को रिलीवर्स (तुरंत राहत पहुँचाने वाली दवा) या रेस्क्युअर्स (बचाव दवा) भी कहते हैं. आप इन्हें किसी इमर्जेंसी के लिए ज़रूरत होने पर ली जाने वाली दवा मान सकते हैं. ये किसी दौरे के समय कफ़ और साँस लेने की तकलीफ़ से राहत पाने में मदद करती हैं. इसलिए जब आप साँस में तकलीफ़ महसूस करें या दौरे के शुरुआती लक्षण दिखाई दें तो सबसे पहले आपको रिलीवर (तुरंत राहत पहुँचाने वाली दवा) लेना चाहिए, जो आपको डॉक्टर ने बताई है. और कुछ साँस लें. यह आपकी हवा नलियों की माँसपेशियों को आराम पहुँचाने में मदद करेगी और साँस लेना आसान बनाएगी.

सभी अस्थमा रोगियों को इमर्जेंसी के लिए अपनी रिलीवर (तुरंत राहत पहुँचाने वाली दवा) हमेशा साथ में रखना चाहिए, भले ही वे कहीं बाहर जा रहे हों. आख़िरकार अस्थमा का दौरा बिना किसी चेतावनी के आता है.

रिलीवर्स (तुरंत राहत पहुँचाने वाली दवा) उपयोग करने के सुझाव

आपको हमेशा अपनी रिलीवर (तुरंत राहत पहुँचाने वाली दवा) अपने साथ रखना चाहिए. इसके बिना कहीं न जाएँ. अस्थमा का दौरा कभी भी और कहीं भी आ सकता है.
दो रिलीवर्स रखें – एक घर में और एक अपने ऑफ़िस में. यदि आपके बच्चे को अस्थमा है तो एक रिलीवर (तुरंत राहत पहुँचाने वाली दवा) स्कूल में रखें.
अपने इन्हेलर को डॉक्टर या उसके सहायक के सामने उपयोग करके दिखाएँ, जिससे वे ग़लत तरीक़े से उपयोग करने की स्थिति में आपको सही तरीक़ा बता सकें. दौरे के समय आपके इन्हेलर का सही उपयोग करना अस्थमा से राहत दिलाने में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है
आपको घर पर अपने परिवार को या ऑफ़िस या स्कूल में अपने मित्रों को सिखाना चाहिए कि इन्हेलर का सही तरीक़े से उपयोग कैसे करें. ताकि यदि आपको दौरा आ जाए, तो वे आपके इन्हेलर से आपकी मदद कर सकें.
अस्थमा का दौरा आने की स्थिति में क्या करना है, यह पता लगाने के लिए यहाँ क्लिक करें.

कृपया ध्यान दें: कौन सी दवा और इन्हेलर उपयोग करना है इसके लिए हमेशा डॉक्टर के बताए अनुसार चलें. अपने इन्हेलर के उपयोग और देखरेख तथा अन्य निर्देशों को अपने डॉक्टर से पूछना न भूलें. साथ ही आपका पहला सत्र महत्वपूर्ण है और यही सुनिश्चित करेगा कि आप प्रारंभ से ही सफल शुरुआत करते हैं. यह वास्तव में आपकी अस्थमा को नियंत्रित करने की लड़ाई में आपकी मदद करेगा.

यदि आपका डॉक्टर आपको दो इन्हेलर उपयोग करने को कहता है, एक कंट्रोलर और एक रिलीवर (तुरंत राहत पहुँचाने वाली दवा). तो उनसे यह ज़रूर पूछें कि कौन सा आपका कंट्रोलर है कौन सा आपका रिलीवर. आप याद रखने में मदद के लिए दवा के पैकेट पर “कंट्रोलर” और “रिलीवर” भी लिख सकते हैं.

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  इन्हेलर्स का उपयोग कैसे करें


पूरी दुनिया में, साँस के द्वारा दवा लेना अस्थमा नियंत्रित करने और बेहतर जीवन का आनंद लेने का एक आसान, सुरक्षित और प्रभावी तरीक़ा साबित हुआ है. साँस के द्वारा दवा लेने में, आप इन्हेलर नामक एक छोटी मशीन के उपयोग से दवा को साँस द्वारा मुँह से खींचते हैं. अस्थमा के रोगियों की ज़रूरतों के लिए उनकी उम्र, सुविधा यहाँ तक कि रोगी की अस्थमा की स्थिति के अनुसार इन्हेलर के विभिन्न प्रकार होते हैं.

इन्हेलर के दो मुख्य प्रकार मीटर्ड डोज़ इन्हेलर्स (MDI) और ड्राय पावडर इन्हेलर्स (DPI) हैं.

मीटर्ड डोज़ इन्हेलर (MDI) को आमतौर पर स्प्रे इन्हेलर भी कहा जाता है क्योंकि यह ठीक इसी तरह कार्य करता है. कई लोग इसे ‘पंप’ कहते हैं क्योंकि इस इन्हेलर के उपयोग में पंपिंग क्रिया होती है.

कई डॉक्टर उनके रोगियों को ड्राय पावडर इन्हेलर (DPI) की सलाह देते हैं.

इनहेलर्स बेहतर क्यों हैं, इस बारे में अधिक जानने के लिए यहाँ क्लिक करें

अपने इन्हेलर का सही उपयोग करना सीखें.

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  अपने अस्थमा को नियंत्रण में कैसे रखें


अस्थमा एक क्रॉनिक (लंबे समय तक बनी रहने वाली) स्थिति है जिसमें नियमित देखरेख और उपचार की ज़रूरत होती है. आपको यह विश्वास अवश्य होना चाहिए कि आप अस्थमा का मुकाबला कर सकते हैं और इसे नियंत्रण में रखकर इस पर विजय प्राप्त कर सकते हैं. जिससे आपको शायद ही कभी फिर अस्थमा का दौरा आए, और आप स्वस्थ और पूर्ण जीवन जी सकें.

अपने अस्थमा को नियंत्रित रखने में मदद के लिए इन 4 चरणों का पालन करें.
अपने ट्रिगर्स से बचें.
अपनी कंट्रोलर दवा नियमित रूप से लें.
पीक फ़्लो मीटर/पीक फ़्लो मास्टर के उपयोग से अपने फेफड़ों की ताक़त की नियमित रूप से जाँच करें.
अपने डॉक्टर के पास नियमित रूप से जाएँ.

यदि आप इन 4 बातों पर ध्यान देते हैं तो आप अपने अस्थमा को नियंत्रित करने की राह पर हैं.


अपने ट्रिगर्स से सावधान रहें
अस्थमा हर व्यक्ति के लिए अलग हो सकता है. हर वयस्क में अलग हो सकता है. और हर बच्चे के लिए भी अलग हो सकता है. इसलिए यह महत्वपूर्ण है कि आप अपने अस्थमा के प्रकार और अपने ट्रिगर्स और लक्षणों को समझें.

चूँकि कुछ ख़ास चीज़ें आमतौर पर अस्थमा के लक्षणों का कारण होती हैं या उसे शुरू कर देती हैं, इसलिए आप उनसे संपर्क को कम करके अपने अस्थमा को नियंत्रित रख सकते हैं. कुछ आम ट्रिगर्स में सिगरेट का धुआँ, वायु प्रदूषण, धूल के कीटाणु, शारिरिक श्रम और व्यायाम, पराग कण, फर या पंख शामिल हैं. यहाँ तक कि बीमारियाँ जैसे सर्दी, खाँसी और वायरस, गहरी भावनाएँ जैसे डर, रोना, हँसना और कुछ दवाएँ जैसे बिना डॉक्टरी सलाह के दर्द निवारक लेना भी शामिल हैं.

एक बार आप अपने विशेष ट्रिगर्स की पहचान कर लेते हैं, तो उनसे बचने के लिए जो बेहतर हो वह करें. इसके अलावा, नियमित इन्हेलेशन थेरेपी अस्थमा को नियंत्रित करने में आपकी मदद करेगी.


अपनी कंट्रोलर दवा नियमित रूप से लें
अपने अस्थमा के लक्षणों को नियंत्रण में रखने के लिए यह जानना महत्वपूर्ण है कि कौन सी दवा और कब लें. इसलिए आपके डॉक्टर के बताए अनुसार अपने कंट्रोलर इन्हेलर का नियमित रूप से उपयोग करें. यदि आप अपने ट्रिगर के संपर्क में आते हैं, तो यह आपके अस्थमा के दौरे की जोख़िम को कम करेगी. और यदि आप अच्छा महसूस कर रहे हों, तब भी कृपया अपने कंट्रोलर को बंद करने की भूल न करें. क्यों? जब कोई ब्लड प्रेशर का रोगी अचानक ब्लड प्रेशर की दवाइयाँ लेना बंद कर दे तो उसका ब्लड प्रेशर बढ़ सकता है. उसी तरह यदि आप अपनी कंट्रोलर लेना बंद कर दें तो आपको अस्थमा का दूसरा दौरा आ सकता है.

यह याद रखना बहुत ज़रूरी है कि आपको अपने डॉक्टर की सलाह के बिना अपनी अस्थमा की दवा लेना बंद नहीं करना है. याद रखें, जैसे-जैसे आपमें सुधार आता जाता है और डॉक्टर को भी ठीक लगता है तो वह धीरे-धीरे आपकी ख़ुराक कम कर सकता है.

जब आप तत्काल राहत चाहते हों, तो अपने रिलीवर (तुरंत राहत पहुँचाने वाली दवा) का उपयोग तुरंत करें. यदि आप इन सब का नियमित पालन करते हैं, तो आप अपने अस्थमा को नियंत्रित रख सकेंगे.

पीक फ़्लो मीटर (ब्रीदोमीटर) के उपयोग से अपने फेफड़ों की ताक़त की नियमित रूप से जाँच करें.
जैसे आप अपने ब्लड प्रेशर इंस्ट्रूमेंट से अपने ब्लड प्रेशर या थर्मामीटर से अपने तापमान की जाँच करते हैं वैसे ही यहाँ आपके फेफड़ों की ताक़त की जाँच करने के लिए पीक फ़्लो मीटर (ब्रीदोमीटर) है. पीक फ़्लो मीटर (ब्रीदोमीटर) से आपके अस्थमा की जाँच करना बहुत आसान है. यह आसान सा यंत्र मापता है कि आप अपने फेफड़ों से हवा कितनी अच्छी तरह से बाहर निकाल सकते हैं. आप स्वयं देखें कि इस पीक फ्लो मीटर (ब्रीदोमीटर) का उपयोग करना कितना आसान है.

उपचार शुरू करने के बाद और कंट्रोलर (तुरंत राहत पहुँचाने वाली दवा) नियमित रूप से लेने के बाद, आप अपने साँस जाँच परिणामों में सुधार देखने के लिए पीक फ़्लो मीटर (ब्रीदोमीटर) का उपयोग कर सकते हैं. इस तरह आपको अपने अस्थमा को नियंत्रित करने में सुधार का अनुमान नहीं लगाना होगा.

आप वास्तव में अपने डॉक्टर के साथ अपना लक्ष्य तय कर सकते हैं और अपने सुधार को माप सकते हैं. यह आपको फ़िट रखने, समझने, और प्रत्येक स्तर पर आपके अस्थमा को नियंत्रित करने में मदद करेगा. सबसे अच्छी बात यह है कि एक बार आपने लक्ष्य प्राप्त कर लिया, तो डॉक्टर भी आपकी ख़ुराक कम करने पर विचार कर सकता है....बशर्ते आप नियमित रूप से पालन करना जारी रखें.

यह सलाह दी जाती है कि आप अपने अस्थमा की जाँच के लिए डॉक्टर के बताए अनुसार नियमित रूप से पीक फ़्लो मीटर (ब्रीदोमीटर) का उपयोग करें. और याद रखें कि यह नियमित जाँच आवश्यक है, भले ही कुछ समय से आपको दौरा नहीं पड़ा हो.

तो आप कहाँ से पीक फ़्लो मीटर (ब्रीदोमीटर) जाँच कर सकते हैं? जब आप अपने डॉक्टर के क्लिनिक में जाएँ तो उससे पीक फ़्लो मीटर (ब्रीदोमीटर) जाँच के बारे में पूछें. अपने डॉक्टर से परामर्श (सलाह) करते समय पीक फ़्लो मीटर (ब्रीदोमीटर) पर अपना व्यक्तिगत सबसे बेहतर (स्कोर) लिख लें. आप अपने केमिस्ट से भी अपना पीक फ़्लो मीटर (ब्रीदोमीटर) ख़रीद सकते हैं. यहाँ क्लिक करके पता लगाएँ कि अस्थमा का निदान कैसे किया जाता है.

अपने डॉक्टर के पास नियमित रूप से जाएँ
अस्थमा से लड़ने में आपकी और आपके डॉक्टर की 50:50 भागीदारी है. उसके पास नियमित रूप से जाएँ, भले ही आप बेहतर महसूस कर रहे हों. अपने इन्हेलर के फ़ायदे के बारे में उससे पूछने में संकोच न करें. उसकी मदद से अपने इन्लेहर का उचित उपयोग और देखरेख सीखें. आपको अपनी मर्जी से कभी अपनी दवा बंद नहीं करना चाहिए. अपने डॉक्टर द्वारा लिखी गई दवा लें.

हो सकता है आपका डॉक्टर आपको कुछ जाँचों की सलाह दे तो वे जाँच कराएँ और अपना उपचार ईमानदारी से अवश्य लेते रहें.

अपनी मेडिकल फ़ाइल सावधानी से अपने साथ रखें ताकि जब आप अपने डॉक्टर के पास जाएँ, तो वह एक बार में आपका मेडिकल इतिहास जान सके. इससे आपके अस्थमा को सफलतापूर्वक नियंत्रित करने में आपके डॉक्टर की मदद मिलेगी.
आपके द्वारा ली जाने वाली किसी भी दवा के बारे में अपने डॉक्टर को बताना न भूलें. कुछ दर्द निवारक अस्थमा के लक्षणों को ट्रिगर कर सकते हैं. इसलिए जब भी आप बीमार हों – चाहे यह पीठ दर्द या बुखार या सर्दी या कुछ भी हो, और विशेष रूप से यदि आप अपनी आँखों की दवा ले रहे हों, तो कृपया अपने डॉक्टर को आपकी दवाइयों के बारे में बताएँ.


अस्थमा और आपकी जीवनशैली

आपको भोजन के लिए कोई विशेष नियम नहीं पालना होंगे और ना ही आपको अपनी पसंद जैसे आइसक्रीम या चॉकलेट से परहेज करना होगा. अस्थमा आपको अपनी पसंद का भोजन लेने से नहीं रोकता...जब तक आप इसकी अति न करें. बस यह याद रखें कि आपको ऐसे भोजन से बचना है जो कोई एलर्जी ट्रिगर कर सकते हैं, जैसे नट्स , या डिब्बा बंद, बोतल बंद, और पैक किया हुआ भोजन जिसमें पूरी तरह से एडिटिव और प्रिज़र्वेटिव हों. यदि आपको ऐसा लगता है कि आपको कोई खाद्य एलर्जी है, तो सलाह के लिए अपने डॉक्टर से संपर्क करें.
सभी को अपना तनाव स्तर कम करने के लिए सुकून और शांति के लिए समय की ज़रूरत होती है. आपको शांति की ज़रूरत है क्योंकि अस्थमा में तनाव एक आम ट्रिगर है.

इसलिए सुकून पाने के कुछ आसान तरीक़े सीखें और उन्हें अपने जीवन का हिस्सा बनाएँ. अच्छे शिक्षक की देखरेख में योग शुरू करें. कोई सुकून देने वाला शौक पैदा करें. बाग़ में सैर करें, अपनी पसंदीदा फ़िल्म देखें…. कोई ऐसा काम करें जिसमें आपको वाक़ई मज़ा आए और जो आपको अपने काम से या तनाव वाली चीज़ों से दूर रखे.
नियमित व्यायाम आपके लिए अच्छा है. अस्थमा को आपको किसी गतिविधि में भाग लेने या व्यायाम का मज़ा लेने में बाधा न बनने दें. यदि आपको यह करना पसंद है तो आपको इसे अपने जीवनशैली का हिस्सा बनाना होगा. और यह आपके सामान्य स्वास्थ्य और आराम के लिए चमत्कार करेगा. इसलिए आगे बढ़ें और सक्रिय बनें! यदि आप व्यायाम करने की योजना बनाते हैं तो अपने डॉक्टर से संपर्क करना न भूलें और फिर उसकी सलाह का पालन करें.

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  अस्थमा के दौरे के समय क्या करें


यदि आप अपनी कंट्रोलर दवा नियमित रूप से लेते हैं और ट्रिगर्स से बचते हैं, तो दौरे आने के अवसर कम हो जाते हैं. लेकिन किसी इमर्जेंसी की स्थिति में निम्न चरणों का पालन अवश्य करें:

आपको सीधे बैठना चाहिए और लेटना नहीं चाहिए. आपके कपड़े ढीले होने चाहिए. आपको शांत होने का प्रयास और आराम करना चाहिए. आपके किसी रिश्तेदार या मित्र को भी किसी भी तरीक़े से आपकी मदद करनी चाहिए और अच्छे ढंग से विश्वास दिलाना चाहिए.
देर किए बिना, आपके डॉक्टर द्वारा बताए गई मात्रा में रिलीवर (तुरंत राहत पहुँचाने वाली दवा) लेनी चाहिए.
फिर 5 मिनट इंतज़ार करें. यदि कोई सुधार नहीं होता है, तो आपके डॉक्टर की सलाह के अनुसार रिलीवर (तुरंत राहत पहुँचाने वाली दवा) की अतिरिक्त ख़ुराक लें.
यदि आपको अब भी आराम नहीं मिलता है, तो तुरंत अपने डॉक्टर को बुलाएँ. यह याद रखना महत्वपूर्ण है कि अपने डॉक्टर की सलाह के बिना रिलीवर (तुरंत राहत पहुँचाने वाली दवा) की मात्रा न बढ़ाएँ.
यदि आपका डॉक्टर तुरंत आपके पास नहीं पहुँच सकता है, तो आपको जल्दी से जल्दी किसी पास के अस्पताल में इमर्जेंसी उपचार के लिए जाना चाहिए.









  विशेष परिस्थितियों में अस्थमा


यदि आपको अस्थमा है, तो यह सब कुछ ख़त्म होने जैसी बात नहीं है. यह जानना महत्वपूर्ण है कि अस्थमा को नियंत्रित किया जा सकता है और आप एक सामान्य जीवन बिता सकते हैं. निम्न अनुभाग विशेष परिस्थितियों में अस्थमा के बारे में बताने का प्रयास करेगा. कुछ विषय जिनकी हम चर्चा करेंगे वे इस प्रकार हैं: गर्भावस्था में अस्थमा, अस्थमा और स्तनपान कराने वाली माता, अस्थमा और आपका काम, अस्थमा और यात्रा, अस्थमा और खेल, अस्थमा और धूम्रपान, अस्थमा और संपूरक दवाएँ, अस्थमा और एलर्जिक राहिनाइटिस और अन्य.

Asthma in pregnancy
गर्भावस्था में
अस्थमा
Asthma in lactating mothers
स्तनपान कराने वाली
माताओं में अस्थमा
Asthma and your job
अस्थमा और
आपका काम
Asthma and travel
अस्थमा और
यात्रा
Asthma and Sports
अस्थमा और
खेल
Asthma and Allergic Rhinitis
अस्थमा और एलर्जिक राहिनाइटिस






गर्भावस्था में अस्थमा:
सबसे पहले, यदि आप परिवार शुरू करना चाहती हैं, तो अस्थमा आपको गर्भवती होने से नहीं रोकेगा. दूसरी बात, यदि आप गर्भवती हैं और आपको अस्थमा है, तो आपको समान्य सुरक्षित डिलीवरी हो सकती है. यह महत्वपूर्ण है कि नियमित दवाओं से आपका अस्थमा नियंत्रित रहे और यह कि आप किसी भी गर्भवती माता के समान सावधानी बरतें – आपका डॉक्टर आपको सबसे बेहतर सलाह देगा. कुछ स्थितियों में, और यदि आप अपनी दवा नियमित रूप से नहीं लेती हैं, तो अस्थमा के लक्षण बिगड़ सकते हैं. साँस के द्वारा ली गई दवाओं के उपयोग के बारे में यह सिद्ध हो चुका है कि उनसे भ्रूण को कोई ख़तरा नहीं है.

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स्तनपान कराने वाली माताओं में अस्थमा:
यदि आपको अस्थमा है और अपने बच्चे को स्तनपान कराना चाहती हैं, तो कृपया ऐसा अवश्य करें. अस्थमा संक्रामक बीमारी नहीं है. यदि आप पहले से ही इन्हेलेशन थेरेपी ले रही हैं, तो माँ के दूध में अस्थमा की दवा की मात्रा बहुत कम होती है. वास्तव में, पूरी दुनिया में स्तनपान कराने वाली जो माताएँ इन्हेलेशन थेरेपी ले रही हैं, अपने बच्चे को बिना किसी साइड इफ़ेक्ट के स्तनपान कराती हैं. ध्यान देने वाली दूसरी बात यह है कि साँस से ली जाने वाली दवा आज बहुत सुरक्षित है, यह गर्भावस्था में सुरक्षित रूप से ली जा सकती है.

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अस्थमा और आपका काम:
यदि आपका अस्थमा बेहतर नियंत्रण में है, तो आपको काम छोड़ने या आर्थिक नुक़सान उठाने की ज़रूरत नहीं. हालाँकि, आभूषणों के व्यवसाय, प्रिंटिंग, कीटनाशक, पत्थर खदान, पेंट और प्लास्टिक उद्योग में कार्य करने वाले लोग, रसोइए और बेकरी में काम करने वाले, सोल्डरर्स और मेटल प्लेटर्स, फ़ोम का काम करने वाले और स्प्रे पेंटर्स, हेयर ड्रेसर्स और कारपेंटर्स में अस्थमा की संभावना अधिक होती है. शायद यह कुछ रसायनों की या कुछ विशेष पदार्थों की गंध का प्रभाव है, जिससे फेफड़ों में जलन होती है. ये ट्रिगर्स कहलाते हैं.

आपको अपना ट्रिगर पहचानना ज़रूरी है, उचित सावधानियाँ बरतें, कंट्रोलर सही तरीक़े से और नियमित रूप से लें, और निश्चित रूप से अपने डॉक्टर से सलाह लें जो आपके लिए सबसे बेहतर होगी.

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अस्थमा और यात्रा:
अस्थमा के कारण आपके काम या यात्रा पर असर नहीं होना चाहिए. यदि आपको अपने काम के सिलसिले में बार-बार यात्रा करनी पड़ती है, तो अपने डॉक्टर की पर्ची की एक प्रति, लिखित निर्देश, और अपने इमर्जेंसी कॉन्टैक्ट नंबर हमेशा अपने साथ रखें. और सबसे महत्वपूर्ण बात, अपनी कंट्रोलर और रिलीवर (तुरंत आराम पहुँचाने वाली दवा) दोनों दवाओं की पर्याप्त मात्रा साथ में रखे बिना कभी यात्रा न करें. जैसा कि आप जानते हैं, आपको अपनी कंट्रोलर नियमित रूप से लेना चाहिए. वास्तव में, हम आपको सलाह देते हैं कि एक अतिरिक्त रिलीवर (तुरंत आराम पहुँचाने वाली दवा) हमेशा अपने पास रखें. यात्रा करने के पहले मौसम की स्थिति की जाँच कर लें और उपयुक्त कपड़े रखकर मौसम परिवर्तन के लिए तैयार रहें. और अधिक जानें…

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अस्थमा और खेल:
अस्थमा किसी को खेल में या जीवन में विजयी बनने से रोकता नहीं है. शीर्ष क्रिकेट खिलाड़ियों को अस्थमा है, बास्केटबॉल खिलाड़ियों को अस्थमा है, यहाँ तक कि तैराकों और धावकों को भी अस्थमा है और उन्होंने ओलंपिक स्वर्ण जीता है.

यदि आपको अस्थमा है और यह बेहतर नियंत्रण में है, तो आप निश्चित रूप से सभी व्यायाम और खेल में सक्रियता से भाग ले सकते हैं. हालाँकि यह ज़रूरी है कि आप डॉक्टर के अनुसार नियमित रूप से अपनी कंट्रोलर लें. कुछ अस्थमा रोगियों को व्यायाम करने के पहले रिलीवर (तुरंत राहत पहुँचाने वाली दवा)/रेस्क्युअर्स (बचाव दआओं) का उपयोग करने से फ़ायदा होता है. इसलिए अपनी रिलीवर (तुरंत राहत पहुँचाने वाली दवा) हमेशा साथ में रखें. सुरक्षा की दृष्टि से, अतिरिक्त दवा अपने साथ रखना न भूलें. अपने टीम के सदस्यों, अपने मित्रों, अपने जिम इंस्ट्रक्टर, या अपने प्रशिक्षक को यह अवश्य बताएँ कि दौरा आने की स्थिति में क्या करना चाहिए.

अस्थमा के लिए सबसे बढ़िया व्यायाम योग और तैराकी तथा स्प्रिंटिंग (कम दूरी की तेज़ दौड़) जैसे खेल हैं क्योंकि इनमें लगातार दौड़ना नहीं पड़ता है और आपको बीच में आराम करने के लिए समय मिल जाता है. यदि आप व्यायाम और खेल के प्रति गंभीर हैं, तो अपने डॉक्टर से नियमित सलाह लें.

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अस्थमा और एलर्जिक राहिनाइटिस:
अस्थमा और एलर्जिक राहिनाइटिस (नाक संबंधी एलर्जी) में गहरा संबंध है. एलर्जिक राहिनाइटिस वाले लोगों को छींक और नाक बहने के साथ लगातार सर्दी की शिक़ायत रहती है. अस्थमा के लगभग 70% रोगियों में एलर्जिक राहिनाइटिस (नाक संबंधी एलर्जी) भी होती है, क्योंकि नाक, साँस नली का एक विस्तार होती है. आमतौर पर, पहले नाक और उसके बाद फेफड़े प्रभावित होते हैं. इसलिए अस्थमा के बेहतर नियंत्रण के लिए एलर्जिक राहिनाइटिस का निदान और उपचार करना ज़रूरी है.

एलर्जिक राहिनाइटिस लक्षणों का एक संग्रह है जो तब प्रकट होते हैं, जब कोई व्यक्ति किसी ऐसी जगह साँस लेता है जहाँ धूल कण, पालतू जानवर या पराग कण जैसी चीज़ें हों, जिससे उसे एलर्जी है.

लक्षण इस प्रकार हैं:
• बहती नाक (नाक से लगातार निकलने वाला तरल पदार्थ)
• छींक आना
• नाक का बंद होना
• नाक में खुजली (नाक, आँखों या चेहरे में खुजली)

ये लक्षण साल के कुछ ख़ास मौसम में दिखाई दे सकते हैं. इसे सीज़नल एलर्जिक राहिनाइटिस (SAR) कहते हैं. यदि ऐसा पूरे साल भर होता है, तो इसे पेरेनियल एलर्जिक राहिनाइटिस (PAR) कहा जाता है.

यह ज़रूरी है कि आप अपने एलर्जिक राहिनाइटिस को गंभीरता से लें क्योंकि यदि इसका समय पर उपचार नहीं किया गया, तो अस्थमा बिगड़ सकता है और अन्य परेशानियाँ जैसे कान में संक्रमण, साइनुसाइटिस हो सकती हैं….सही उपचार के लिए अपने डॉक्टर के पास जाएँ.

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